मै ढूँढता हूँ जिसे वोह जहाँ नही मिलता
नयी ज़मीन नया आसमां नही मिलता
नयी ज़मीन नया आसमां भी मिलजाये
नये बशर का कहीं कुछ निशाँ नही मिलता...
*
मै ये सोंच कर उसके दर से उठा था
की वह रोक लेगी, मन लेगी मुझको
...
मगर उसने रोका न मुझको मनाया
न दामन he पकड़ा न मुझको बीठाया
न आवाज़ he दी, न वापस बुलाया
मै आहिस्ता आहिस्ता बरता he चला अया
यहाँ तक के उससे जुदा हो गया मै
*
बस एक झिज्ज्हक है येही हाले दिल सुनाने मे,
की तेरा ज़िक्र भी आयेगा इस फसाने माय
*
सुना करो मेरी jaan इनसे उनसे अफसाने
सब अजनबी है यहाँ कौन किसको पहचाने
...
बहार आये तौ मेरा सलाम कहना,
mujhay तौ आज talab कर लिया है sehra ने
*
Kaifi Azmi's poetry translated by Pavan Varma in English. But just to retain the flavour, I have attempted to produce them in Hindi. If you get hold of Kaifi's audio album, kaifiyat, you will just enjoy it.

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